Mother_s Day

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Poetry

तेरी गोद ही संपूर्ण सृष्टि हो

माँ आज तू नहीं है यहाँ जैसे तेरी राख गंगा की हर लहर में समायी थी. मैं जानता हूँ माँ ठीक वैसे ही सृष्टि की हर लहर में तेरी गूँज है. यह तारों की चमक, यह पत्

09 May 10 1 min read

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